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झूठ पर कविताएँ

झूठ मिथ्या या असत्य

वचन है। इसे सत्य का छद्म या भ्रम भी कहा जाता है। यहाँ झूठ शब्द-केंद्र पर परिधि पारती कविताओं का एक चयन प्रस्तुत है।

झूठ बोलती लड़कियाँ

ज्योति चावला

वस्तुओं का न्याय

कुमार अम्बुज

मिथ्या के विरुद्ध दिन

आलेहांद्रा पिज़ारनीक

अहसास ही रंगतें

यानिस रित्सोस

झूठ

येव्गेनी येव्तुशेंको

कलयुग

आशीष त्रिपाठी

रामराज लइ आवइ के

मोहनलाल यादव

परिपाटी

आरसी प्रसाद सिंह

एखनुक हाल

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

वह माफ़ी माँगता है

आशीष त्रिपाठी

तय करना होगा

संजय शांडिल्य

कविता

नीरज नीर

मिथ्याचार

तिरुवल्लुवर

त्रास

अनादि सूफ़ी

नई संस्कृति

दूधनाथ सिंह

वे मुझसे झूठ बोलते हैं

राजकुमार कुंभज

पते की बात

अतुलवीर अरोड़ा

प्रजातंत्र

कुंदन सिद्धार्थ

सफ़ेद झूठ

प्रियंका यादव

हिन्दवी उत्सव 2026

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