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दिल पर ग़ज़लें

कवियों-शाइरों के घर

दिल या हृदय एक प्रिय शब्द की तरह विचरता है, जहाँ दिल की बातें और दिल के बारे में बातें उनकी कविताई में दर्ज होती रहती हैं। यह चयन दिल पर ज़ोर रखती ऐसी ही कविताओं में से किया गया है।

तीर करेजा के

मिथिलेश ‘गहमरी’

जहर नस-नस चढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

हवा में बा

जगन्नाथ

साँस पर राग

गहबर गोवर्द्धन

चढ़ल बसन्त में

अशोक द्विवेदी

दिल में जैसे धड़कन

डॉ. वेद मित्र शुक्ल