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फूल पर ग़ज़लें

अमेरिकी कवि एमर्सन ने

फूलों को धरती की हँसी कहा है। प्रस्तुत चयन में फूलों और उनके खिलने-गिरने के रूपकों में व्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

उमड़ल नदी के धार

जौहर शफियाबादी

घर अन्हरिया के सुरूज

मिथिलेश ‘गहमरी’

ई का गजब भइल

जौहर शफियाबादी

काम सब जहुआ

ए. कुमार ‘आँसू’

कहे के रहत बानी

मिथिलेश ‘गहमरी’

नैनन से आँसू

ए. कुमार ‘आँसू’

ना हँसी बाटे

मिथिलेश ‘गहमरी’

फूल पर 'करफू

मिथिलेश ‘गहमरी’

कभी लौ का इधर जाना

डी. एम. मिश्र