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फूल पर ग़ज़लें

अमेरिकी कवि एमर्सन ने

फूलों को धरती की हँसी कहा है। प्रस्तुत चयन में फूलों और उनके खिलने-गिरने के रूपकों में व्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

नैनन से आँसू

ए. कुमार ‘आँसू’

उमड़ल नदी के धार

जौहर शफियाबादी

घर अन्हरिया के सुरूज

मिथिलेश ‘गहमरी’

ना हँसी बाटे

मिथिलेश ‘गहमरी’

ई का गजब भइल

जौहर शफियाबादी

काम सब जहुआ

ए. कुमार ‘आँसू’

कहे के रहत बानी

मिथिलेश ‘गहमरी’

आम महफिल में बनिके खास रहीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

फूल पर 'करफू

मिथिलेश ‘गहमरी’

कभी लौ का इधर जाना

डी. एम. मिश्र

हिन्दवी उत्सव 2026

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