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फूल पर गीत

अमेरिकी कवि एमर्सन ने

फूलों को धरती की हँसी कहा है। प्रस्तुत चयन में फूलों और उनके खिलने-गिरने के रूपकों में व्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

खिली थी, झर गई बेला

देवेंद्र कुमार बंगाली

एक पेड़ चाँदनी

देवेंद्र कुमार बंगाली

ये शरद के फूल

ओम निश्चल

बसन्त रितु रंग भरे

अशोक द्विवेदी

आँजुर भरि कचनारक फूल

मार्कण्डेय प्रवासी

साँझ झुकती आ रही है

ज्ञानवती सक्सेना

एक देवी

मनोज जैन

गेंदा फूल

प्रसून जोशी

काँटो किछु गमकै छल

मार्कण्डेय प्रवासी

मैं हूँ बनफूल

भारत भूषण

कतेक दिनपर

शान्ति सुमन

खिले फूल गेंदे के

देवेंद्र कुमार बंगाली

क्षणों के फूल

शंभुनाथ सिंह

हिन्दवी उत्सव 2026

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