नीति पर सबद

नीति-विषयक दोहों और

अन्य काव्यरूपों का एक विशिष्ट चयन।

बिहंगम कौन दिसा उड़ि जइहो

दरिया (बिहार वाले)

तेरो कपरा नहीं अनाज

दरिया (बिहार वाले)

दुनियाँ भरम भूल बौराई

संत दरिया (मारवाड़ वाले)

संतो कहा गृहस्त कहा त्यागी

संत दरिया (मारवाड़ वाले)

बिहंगम बोलु बचन बनबासी

दरिया (बिहार वाले)

बहुत पंसारी हाट में

दरिया (बिहार वाले)