नीति पर सबद

नीति-विषयक दोहों और

अन्य काव्यरूपों का एक विशिष्ट चयन।

बिहंगम कौन दिसा उड़ि जइहो

दरिया (बिहार वाले)

तेरो कपरा नहीं अनाज

दरिया (बिहार वाले)

है बलवंती माया

हरिदास निरंजनी

संतो कहा गृहस्त कहा त्यागी

संत दरिया (मारवाड़ वाले)

दुनियाँ भरम भूल बौराई

संत दरिया (मारवाड़ वाले)

गाफिल नींद न करिये रे

हरिदास निरंजनी

बिहंगम बोलु बचन बनबासी

दरिया (बिहार वाले)

बहुत पंसारी हाट में

दरिया (बिहार वाले)

रमईया तुम बिन रह्यो न जाइ

तुरसीदास निरंजनी

मन रे तूँ स्याणा नहीं

हरिदास निरंजनी

समझि देखि मन मेरा रे

हरिदास निरंजनी

अब मैं आयो सरन तुम्हारी

तुरसीदास निरंजनी

तब हरि हम कूँ जांणैंगे

हरिदास निरंजनी

ऐसो ज्ञान बिचारहु रे

तुरसीदास निरंजनी

संतो! राम रजा मैं रहिए

हरिदास निरंजनी

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