प्रायश्चित पर कविताएँ

किसी दुष्कर्म या पाप

के फल भोग से बचने के लिए किए जाने वाले शास्त्र-विहित कर्म को प्रायश्चित कहा जाता है। प्रायश्चित की भावना में बहुधा ग्लानि की भावना का उत्प्रेरण कार्य करता है। जैन धर्म में आलोचना, प्रतिक्रणण, तदुभय, विवेक, व्युत्सर्ग, तप, छेद, परिहार और उपस्थापना—नौ प्रकार के प्रायश्चितों का विधान किया गया है।

संभव है

प्रदीप अवस्थी

दिल्ली 2018

गिरिराज किराडू

दीनदयाल दया करिए

प्रतापनारायण मिश्र

हमारा पतन

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

राम-विनय

बालमुकुंद गुप्त

जाना तब

राहुल राजेश

अफ़सोस-दर्पण

हेमंत शेष