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लोकतंत्र पर गीत

लोकतंत्र जनता द्वारा,

जनता के लिए, जनता का शासन है। लोकतंत्र के गुण-दोष आधुनिक समय के प्रमुख विमर्श-विषय रहे हैं और इस संवाद में कविता ने भी योगदान किया है। प्रस्तुत चयन ऐसी ही कविताओं का है।

जनता के पलटनि

गोरख पांडेय

समाजवाद

गोरख पांडेय

समय का पहिया

गोरख पांडेय

वाह रे हिन्दुस्तान!

रामजियावान दास ‘बावला’

बाजू, अछि जनतंत्र कतय?

मार्कण्डेय प्रवासी

भदैया होली

कालीकान्त झा ‘बूच’

देखहक हौ गान्धी बाबा!

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

अइसन लागल चोट

ब्रजभूषण मिश्र

जनतंत्र

रामजियावान दास ‘बावला’

इजोतक खातिर

दीपिका चन्द्रा

आइ राजनीति

मार्कण्डेय प्रवासी

आजादी पउलस के?

रामजियावान दास ‘बावला’

बारूद पर गाँव

ब्रजभूषण मिश्र

आइल फिर 26 जनउरी

रामजियावान दास ‘बावला’

जयजयकार करैए लोक

मार्कण्डेय प्रवासी

नमन बाटै

रामजियावान दास ‘बावला’

दुपहरियाक रौदमे

गंगेश गुंजन

आयल चुनाव फेरु आय गइलैं

रामजियावान दास ‘बावला’

अबकी जिताइ के देखा हो पंचो

रामजियावान दास ‘बावला’

काले-काले बादल छाए

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

जनता के पलटनि

गोरख पांडेय

जव वोट मांगे अइले

गोरख पांडेय

सजी सुखवा लूटे रजधानी

ब्रजभूषण मिश्र

ना हटल मकड़जाला

तैयब हुसैन पीड़ित

पंचन के प्रपंच में

ब्रजभूषण मिश्र

शिव ई बाना

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

कोनो नहि अन्तर

मार्कण्डेय प्रवासी

मिथिलाक दु:दशा

कालीकान्त झा ‘बूच’

समाजवाद

गोरख पांडेय

भ्रष्टाचार

रामजियावान दास ‘बावला’

घूमत बाटे शान से

ब्रजभूषण मिश्र