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लोकतंत्र पर ग़ज़लें

लोकतंत्र जनता द्वारा,

जनता के लिए, जनता का शासन है। लोकतंत्र के गुण-दोष आधुनिक समय के प्रमुख विमर्श-विषय रहे हैं और इस संवाद में कविता ने भी योगदान किया है। प्रस्तुत चयन ऐसी ही कविताओं का है।

बालू के देवार बा, बाबा

तैयब हुसैन पीड़ित

अदालतमे चिता

राम चैतन्य धीरज

कतय छै आँच बूझल छै

आनन्द मोहन झा

हम नदी ओ समुंदर रहै

आनन्द मोहन झा