Font by Mehr Nastaliq Web

संस्कार पर उद्धरण

जो निकट होने से बृहत्; दूर होने से छोटा है, जो बाह्य होने से प्रत्यक्ष और आंतरिक होने से प्रच्छन्न है, रूप में निरर्थक और संयुक्त रूप में सार्थक है, उसकी यथार्थता सुरक्षित रखते हुए उसे देखना—यही हमारी शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।

रवींद्रनाथ टैगोर

संस्कारों की बाधाएँ टूटकर, जो मिलन स्वाभाविक हो उठता है―वही तपोवन का मिलन है।

रवींद्रनाथ टैगोर

सत्य अपना पूरा मूल्य चाहता है।

हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • संबंधित विषय : सच