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माँ पर गीत

किसी कवि ने ‘माँ’ शब्द

को कोई शब्द नहीं, ‘ॐ’ समान ही एक विराट-आदिम-अलौकिक ध्वनि कहा है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें माँ आई है—अपनी विविध छवियों, ध्वनियों और स्थितियों के साथ।

टिल्लू जी

नरेश सक्सेना

माँ

प्रसून जोशी

फूटल किरिन हजार...

अशोक द्विवेदी

काहे जननी क सनेहिया परइला तोड़ के

रामजियावान दास ‘बावला’

जेना हमर माय

शान्ति सुमन

ईमा

देवेंद्र कुमार बंगाली

मातृ-महिमा

गोपालशरण सिंह