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माँ पर ग़ज़लें

किसी कवि ने ‘माँ’ शब्द

को कोई शब्द नहीं, ‘ॐ’ समान ही एक विराट-आदिम-अलौकिक ध्वनि कहा है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें माँ आई है—अपनी विविध छवियों, ध्वनियों और स्थितियों के साथ।

झलकेले खुशी बीच

अशोक द्विवेदी

जाने कइसन जादू

मिथिलेश ‘गहमरी’

रास्ता

डी. एम. मिश्र