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सुख पर ग़ज़लें

आनंद, अनुकूलता, प्रसन्नता,

शांति आदि की अनुभूति को सुख कहा जाता है। मनुष्य का आंतरिक और बाह्य संसार उसके सुख-दुख का निमित्त बनता है। प्रत्येक मनुष्य अपने अंदर सुख की नैसर्गिक कामना करता है और दुख और पीड़ा से मुक्ति चाहता है। बुद्ध ने दुख को सत्य और सुख को आभास या प्रतीति भर कहा था। इस चयन में सुख को विषय बनाती कविताओं का संकलन किया गया है।

नैनन से आँसू

ए. कुमार ‘आँसू’

झलकेले खुशी बीच

अशोक द्विवेदी

चमक दमक में

अशोक द्विवेदी

याद के तहरे

जौहर शफियाबादी

हवा ख़िलाफ़ है

डी. एम. मिश्र

उनका अइला से कतना

नागेन्द्र प्रसाद सिंह