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Shayak Aalok's Photo'

शायक आलोक

1983 | बेगूसराय, बिहार

नई पीढ़ी के सुपरिचित कवि-गद्यकार।

नई पीढ़ी के सुपरिचित कवि-गद्यकार।

शायक आलोक के बेला

09 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

स्मृति के घर अँधेरा स्मृति के घर अँधेरा बहुत है। सिर्फ़ आँखें काम नहीं करतीं। नाक भी लगता है काज पर। शून्य को सुनना पड़ता है कानों को। हाथों को हवा को टटोलना पड़ता है। विस्मृति ने कोई शोर भी तो नहीं

02 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

छायालीन यह दृश्य है या एक ठहरा हुआ उच्चारण! जैसे समय ने अपनी जीभ बाहर निकाल शब्द को अधूरा छोड़ दिया हो। क्षितिज पर शहर कोई ठोस आकृति नहीं, धुंध का अभ्यास है। वह अपने होने को सिद्ध नहीं करता, संकेत

25 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

स्फुलिंग कमरा-तर, कमरा-कम या अ-कमरा जैसे शब्द भी कहीं होते हैं, कहो तो! तो फिर बहुत से कमरों के बारे में अंतर की कुछ-कुछ बातें कहने के लिए यो-वो शब्द न हो तो किस कार्य में लगेगा वह कवि के? अंतर की

18 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : दिनानुदिन की चूलें बिठाते हुए

शनिवारेर चिट्ठी : दिनानुदिन की चूलें बिठाते हुए

सोमवार मैं लौटने की आख़री सड़क पर हूँ। यह सोमवार की तेज़ भागती सड़क है। इसकी रफ़्तार को दो दिनों के घर-आराम के बाद ‘काम पर लौटने’ के पंख लगे हैं। घर से पश्चिम की ओर निकलती है पहली सड़क। वह रास्ता बदलती

11 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा

शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा

अथ कोई अलसकथा नहीं! रविवार के उस दुपहर-उष्ण में ऊँघने के स्वाँग में तुम्हारी पीठ पर श्वासों की सुदीर्घ कविताओं का पाठ नहीं कर सका, खमा करो। मुझे एक नए आरंभ की पहली सीढ़ी पर पाँव धरने थे। अभी कितना

18 मार्च 2026

कविता का स्वप्न और स्वप्न में कविता

कविता का स्वप्न और स्वप्न में कविता

दो औंस लंदन ड्राई जिन, एक औंस फ़्रेंच वर्माउथ, आधा चम्मच बेनेडिक्टिन, दो डैश ऑरेंज बिटर्स और एक सुंदर गिलास हो। इस गिलास को पहले से बहुत ठंडा कर लिया जाए और सब सामग्रियों को डालते ही तुरंत इसमें बर्फ़

18 नवम्बर 2025

मार्गरेट एटवुड : मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं

मार्गरेट एटवुड : मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं

Men are afraid that women will laugh at them. Women are afraid that men will kill them. मार्गरेट एटवुड का मशहूर जुमला—मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं; औरतें डरती हैं कि मर्द उन्हें क़त्ल

11 नवम्बर 2025

पाप से अछूती देवी नहीं, करुणा से पवित्र हुई पापिनी!

पाप से अछूती देवी नहीं, करुणा से पवित्र हुई पापिनी!

सोन्या! वह जैसे ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ के उजाड़ नैतिक दृश्य से एक विसंगति रखती है। वह किसी आदर्श प्रतिमा की तरह नहीं गढ़ी गई है, बल्कि एक जीवित विडंबना है। कैसी स्त्री जो अँधेरे में दीप्त होती है!

07 नवम्बर 2025

कामू-कमला-सिसिफ़स

कामू-कमला-सिसिफ़स

“The struggle itself toward the heights is enough to fill a man’s heart. One must imagine Sisyphus happy.” —अल्बैर कामू, द मिथ ऑफ़ सिसिफ़स कुछ सुबहें होती हैं जब दुनिया कुछ तिरछी प्रतीत होती है

23 सितम्बर 2025

बिल्लियों के नौ जीवन पाप से भरे हैं

बिल्लियों के नौ जीवन पाप से भरे हैं

पश्चिमी लेखकों, कलाकारों, विचारकों के कारण बिल्लियों पर मेरा विशेष ध्यान गया। डॉग फ़ॉर सोल्ज़र्स, कैट्स फॉर आर्टिस्ट्स। कुत्ता गद्य है, बिल्लियाँ कविता। एक लेखक जिन कारणों से एक बिल्ली का साथ पसंद करता

13 दिसम्बर 2024

जो बचा है वह है बस शब्दों का एक नगर

जो बचा है वह है बस शब्दों का एक नगर

मैं, पम्पा कम्पाना, हूँ इस कृति की रचयिता/ मैंने एक साम्राज्य का उत्थान और पतन देखा है/ अब उन्हें कैसे याद करता है कोई, उन राजाओं और उन रानियों को?/ अब वे बचे हैं बस शब्दों में/ वे थे तो थे विजेता या

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