लाओत्से के उद्धरण
जो विनम्र होता है, वह अपने को पूर्ण रूप से सुरक्षित रख सकता है। जो झुकना जानता है, वही तनकर खड़ा हो सकता है। जो सब कुछ त्याग कर सकता है, वह पूर्णकाम होता है। जो जर्जर हो जाता है, वह नव जीवन प्राप्त करता है। जो थोड़े में संतुष्ट रहता है, वह सफल हो जाता है। जो बहुत संचय करने का प्रयत्न करता है, वह पथभ्रष्ट हो जाता है।
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जो पंजे के बल पर खड़ा होना चाहता है, वह ठीक से खड़ा नहीं हो सकता। जो अपने दोनों पैर फैला देता है, वह चल नहीं सकता। जो आत्म प्रंशसा करता है, वह यश प्राप्त नहीं कर सकता। अहंकारी मनुष्य में गुण नहीं रह सकते। जो अपने को सबसे ऊपर मानता है, वह ऊपर नहीं उठ पाता।
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बुराई के प्रति भलाई का व्यवहार करो।
संत अपनी प्रंशसा नहीं करता, इससे सर्वत्र उसकी प्रंशसा होती है। अपने कार्य के प्रति वह अहंकार नहीं करता, इससे वह स्थायी होता है। वह किसी का विरोध नहीं करता, इसी से कोई भी व्यक्ति उसका विरोध नहीं करता।
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वासनाओं के वशीभूत होने से बढ़कर कोई पाप नहीं है, अपनी परिस्थिति से असंतुष्ट रहने से बढ़कर कोई विपत्ति नहीं है और परिग्रह के बढ़कर कोई दोष नहीं है। इसलिए संतोष की ही अंतिम रूप से सार्थकता सिद्ध होती है।
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यदि सरकार सहिष्णु होती है, तो जनता बुरे मार्गों से दूर रहती है। यदि सरकार की तरफ़ से अनावश्यक हस्तक्षेप होता है, तो लोग शासन को नियमों का उलंघन करने लगते हैं।
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अपने अज्ञान को जानना सर्वोतम है। अज्ञानी होते हुए अपने को बुद्धिमान समझना बहुत बड़ी बीमारी है। जो इस बीमारी को बीमारी के रूप में जानता है, वही इससे मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
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जो दूसरे मनुष्यों को जानता है, वह विवेकी है। जो अपने को जानता है, वह ज्ञानी है। जो दूसरों को वशीभूत करता है, वह बलवान है। जो अपने को वशीभूत करता है, वह अत्यंत शक्ति-संपन्न है। जो अपनी परिस्थिति से संतुष्ट है, वही घनी है।
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जब यश प्राप्त हो, तो उसके प्रति अहंकार मत करो। यदि अहंकार से मुक्त रहोगे, तो यश सदा सुरक्षित रहेगा।
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संत अपने लिए संचय नहीं करता। जितना अधिक वह दूसरों पर ख़र्च करता है, उतना ही वह संपन्न होता है।
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जो बलवान होते हुए भी अपनी महान दुर्बलता में संतोष करता है, वह मनुष्यों का प्रशंसा-पात्र और आकर्षण-केंद्र बन जाता है।
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धर्म मार्ग अत्यंत प्रशस्त तथा सरल है, फिर भी लोग अन्य मार्गों पर चलना चाहते हैं।
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संबंधित विषय : धर्म
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सज्जनों के प्रति हम अच्छा व्यवहार करेंगे। दुर्जनों के प्रति भी हम अच्छा व्यवहार करेंगे, जिससे वे सज्जन बन सकें।
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कौन ऐसा व्यक्ति है, जो अपनी महान महिमा को विश्व को प्रदान कर सकता है? वही जो ताओ को प्राप्त कर चुका है।
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प्रकृति बदली नहीं जा सकती। भाग्य का परिवर्तन संभव नहीं है। काल रुक नहीं सकता।
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