अनफ़्रेम्ड : भारतीय सिनेमा में कॉमरेड, आंदोलन और लाल सलाम
जब कोई अपने अधिकारों के लिए लड़ता है, उसे बड़ी हिम्मत से काम लेना होता है; हो सकता है उसे बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़े, उस वक़्त जो हौसला बढ़ाता है और मंज़िल पाने में मदद करे, उस इंसान को कह
अनफ़्रेम्ड : हिंदी साहित्य और सिनेमा की इन गुमनाम कड़ियों को जानते हैं आप?
सत्तर के दशक के आरंभिक वर्ष हिंदी साहित्य और सिनेमा के बीच संबंधों के लिहाज़ से सबसे उल्लेखनीय साल माने जा सकते हैं। भारतीय सिनेमा में नए प्रयोग हो रहे थे। प्रयोग करने वाले ज़्यादातर निर्देशक पूना फ़िल्
15 अक्तूबर 2026
अनफ़्रेम्ड : टैरेंटीनो के बहाने, हॉलीवुड से इलाहाबाद तक
क़रीब सात साल पहले इन्हीं दिनों क्वेंटिन टैरेंटीनो की फ़िल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन हॉलीवुड’ देखी थी। अक्सर बदलता मौसम आपको पुरानी पढ़ी किताबों, देखी गई फ़िल्मों और ज़माने पहले सुने गए संगीत की याद दिला
अनफ़्रेम्ड : नाना पाटेकर : आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने!
नाना पाटेकर (1 जनवरी 1951–8 अक्टूबर 2026) हिंदी पॉपुलर सिनेमा के पहले और शायद आख़िरी एब्सर्ड किरदार थे। हमने दुःख और त्रासदी में डूबे दिलीप कुमार के समानांतर राज कपूर को देखा—भोला और ग़रीब, लेकिन नैतिक
अनफ़्रेम्ड : लाइफ़ में जब ‘स्किप इंट्रो’ नहीं था
मुझे प्रतीक्षा की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति ‘रजनीगंधा’ फ़िल्म में दिखती है, बासु चटर्जी इंतज़ार और दूरियों के बीच सिमटे छोटे-छोटे पलों को सहेजते चलते हैं। “रजनीगंधा फूल तुम्हारे...” गीत देखते हुए स्क्रीन
अनफ़्रेम्ड : 5G की स्पीड में 60 के दशक की ‘तड़प’
ऐसा मेरे साथ कभी पहले नहीं हुआ था, तो यह बात मेरे मन में बैठ गई। ऑफ़िस से घर लौटते समय स्पॉटिफ़ाई पर अचानक लता मंगेशकर का एक गीत लूप में बज उठा, जिसे पहले कभी नहीं सुना था। गीत था, ‘हम तेरे प्यार में स
अनफ़्रेम्ड : AI से परे हाँफता वो असल ‘अस्सी’
अस्सी का दशक रस्सियों से बँधा हिलता हुआ एक पुल था। इसके एक छोर पर पीली टिमटिमाती हुई रोशनियाँ थीं और दूसरे छोर पर नीली डेनिम पहने हाथ में गिटार लिए कोई युवा। शुरुआत जर्जर और थकी हुई थी और अंत ओस की ब