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आँसू पर ग़ज़लें

मानवीय मनोभाव के एक

प्रकट चिह्न के रूप में आँसू हमेशा से काव्य के विषय-वस्तु रहे हैं और वृहत रूप से इनके बहाने से कवियों ने विविध दृश्य और संवाद रचे हैं।

बात कुछ बनत

कृष्णानन्द कृष्ण

घटी का, बढ़ल

गहबर गोवर्द्धन

आदमी के देख के

कृष्णानन्द कृष्ण

नैनन से आँसू

ए. कुमार ‘आँसू’

देंह के रंग

मिथिलेश ‘गहमरी’

रात के भेद

मिथिलेश ‘गहमरी’

नोर

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

रात के भेद

मिथिलेश ‘गहमरी’