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आँसू पर ग़ज़लें

मानवीय मनोभाव के एक

प्रकट चिह्न के रूप में आँसू हमेशा से काव्य के विषय-वस्तु रहे हैं और वृहत रूप से इनके बहाने से कवियों ने विविध दृश्य और संवाद रचे हैं।

आदमी के देख के

कृष्णानन्द कृष्ण

बात कुछ बनत

कृष्णानन्द कृष्ण

नैनन से आँसू

ए. कुमार ‘आँसू’

घटी का, बढ़ल

गहबर गोवर्द्धन

रात के भेद

मिथिलेश ‘गहमरी’

देंह के रंग

मिथिलेश ‘गहमरी’

रात के भेद

मिथिलेश ‘गहमरी’

लोर हर बात के गवाही बा

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

नोर

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

हिन्दवी उत्सव 2026

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