व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज़ है, बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची; परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है।
प्रत्येक व्यक्ति को कुलीनता और अकुलीनता के भाव को अलग रखकर, अपनी उन्नति का पूरा अवसर मिलना चाहिए। किसी राजा का कुलीन का स्वार्थ, किसी की उन्नति का बाधक न हो।
जीवन और प्रेम का विकसित क्रम द्वैत नहीं अद्वैत है
इंडिविजुअल ह्यूमन बीइंग्स—जिस पर यूरोप को गर्व है कि उनकी देन है—मैं कहना चाहता हूँ कि भारत में वह भक्ति की देन है। वह अंग्रेजों का तोहफ़ा नहीं है।
इंग्लैंड वैयक्तिकता, सनक, अनधिकृतमत असंगतियों, शौक़ों और मज़ाक़ों का स्वर्ग है।
व्यक्ति वह नहीं है; जो ऐसा है कि उस जैसा और संसार में कोई है ही नहीं—व्यक्ति एक प्रतिनिधि है ।
भारत पार्थक्य को विरोध नहीं समझता, परकीय को शत्रु नहीं समझता, बिना किसी का विनाश किए, एक बृहत् व्यवस्था में सभी को स्थान देना चाहता है।
-
संबंधित विषय : रवींद्रनाथ ठाकुर