आसित आदित्य के बेला
कहानी : प्रेम और अपराध और दंड
इतनी बारिश! इतनी बारिश कब हुई थी, याद नहीं आता। संभव है कभी हुई ही न हो... गाँव के दक्खिन की तरफ़ की बसावट जिसे कुछ लोग ‘हरिजन बस्ती’ भी कहते थे और उन कुछ में कुछ वे लोग थे जो एक मँझे हुए राजन
कहानी : एक पापी की डायरी
इस तथ्य को बतौर ढाल के रूप में प्रयोग करते हुए, ताकि अपनी अंतरात्माओं के हमलों से हम स्वयं को बचा सकें कि इन शब्दों को लिखने वाला अब इस दुनिया में नहीं है, कि एक दशक पहले अगस्त महीने की एक बरसती शाम
सैयारा : दुनिया को उनसे ख़तरा है जो रो नहीं सकते
इन दिनों जीवन कुछ यूँ हो चला है कि दुनिया-जहान में क्या चल रहा है, इसकी सूचना सर्वप्रथम मुझे फ़ेसबुक देता है (और इसके लिए मैं मार्क ज़ुकरबर्ग या सिलिकॉन वैली में बैठे तमाम तकनीकी कीड़ों का क़तई कृतज्
सबसे सुंदर होते हैं वे चुम्बन जो देह से आत्मा तक का सफ़र करते हैं
अंतिम यात्रा लौट आने के लिए नहीं होती। जाने क्या है उस नगर जो जाने वाला आता ही नहीं! (आना चाहता है या नहीं?) सब जानते हुए भी—उसको गए काफ़ी वक़्त गुज़रा पर— उसकी चीज़ें जहाँ थीं, वहाँ से अब तक नहीं