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आसक्ति पर बेला

04 सितम्बर 2026

लगभग तीन दिन दो रातें

लगभग तीन दिन दो रातें

मुझे पता चल चुका था कि वहाँ वह मेरी प्रतीक्षा करने के लिए नहीं होगा… और जब यह पता चल चुका था तो यह कैसे न मालूम होता कि वहाँ मुझे उसका इंतिज़ार करना था। उसके स्कार्फ़ का... मेरे गले का फंदा बनने को आ

03 नवम्बर 2025

गमछा : एक नमीदार सहचर

गमछा : एक नमीदार सहचर

जब भी मैं किसी थके हुए आदमी को देखती हूँ, जिसकी गर्दन पर पसीने से भीगा गमछा रखा होता है, मुझे सोबरन कक्का याद आते हैं। उनके माथे का पसीना उसी में उतरता, खेत की मिट्टी उसी से झाड़ी जाती और जब वह चुप ह