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रामायण पर गीत

लगी जाई भूख त का खइबा हो

रामजियावान दास ‘बावला’

आउ हमर हे राम प्रवासी

कालीकान्त झा ‘बूच’

सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय

रामजियावान दास ‘बावला’

कइसे लेहीं उतराई हो

रामजियावान दास ‘बावला’

कवन बन गइलैं ललना हमार हो

रामजियावान दास ‘बावला’

कौशल्या राम से

रामजियावान दास ‘बावला’

कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइलै

रामजियावान दास ‘बावला’

केवट बोलल रामचन्द्र से

रामजियावान दास ‘बावला’

काहे जननी क सनेहिया परइला तोड़ के

रामजियावान दास ‘बावला’

बबुआ बोलता ना

रामजियावान दास ‘बावला’