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घर पर ग़ज़लें

महज़ चहारदीवारी को ही

घर नहीं कहते हैं। दरअस्ल, घर एक ‘इमोशन’ (भाव) है। यहाँ प्रस्तुत है—इस जज़्बे से जुड़ी हिंदी कविताओं का सबसे बड़ा चयन।

बस दू दिन

ए. कुमार ‘आँसू’

बह रहल बा

ए. कुमार ‘आँसू’

कहे के रहत बानी

मिथिलेश ‘गहमरी’

रोज भिहिलत देवाल

मिथिलेश ‘गहमरी’

अदालतमे चिता

राम चैतन्य धीरज

काहे उनका अभी

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

घर अन्हरिया के सुरूज

मिथिलेश ‘गहमरी’

गाँव में

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

ये शहर

डॉ. वेद मित्र शुक्ल