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रॉबर्ट ब्राउनिंग

1812 - 1889 | लंदन

रॉबर्ट ब्राउनिंग के उद्धरण

अज्ञान निर्दोषता नहीं है, पाप है।

जब मनुष्य अपने अंदर युद्ध करने लगता है तब वह अवश्य ही किसी योग्य होता है।

उसने सत्य बातें कहीं किंतु उन्हें ग़लत नाम दिए।

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कौन जानता है कि संसार आज रात्रि में ही समाप्त नहीं हो जाएगा?

ईश्वर पूर्ण कवि है जो स्वयं अपनी रचनाओं का अभिनय करता है।

क्षमा करना अच्छा है। भूल जाना सर्वोत्तम है।

मैं सदैव योद्धा रहा, अतः एक युद्ध और लड़ूँगा जो सर्वोत्तम और अंतिम होगा। मुझे इस बात से घृणा है कि मृत्यु मेरी आँखों पर पट्टी बाँधे और अलग रहे तथा मुझे उसके पीछे रेंगना पड़े।

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