रीतिकाल

काव्यशास्त्र की विशेष परिपाटी का अनुसरण करने के कारण 1643 ई. से 1843 ई. के समय को साहित्य का रीतिकाल कहा गया है। घोर शृंगार काव्य के अतिरिक्त इस दौर में भावुक प्रेम, वीरता और नीतिपरक कविताएँ लिखी गईं।

अलक्षित

रीतिकालीन अलक्षित कवि।

रीतिकाल के अलक्षित कवि।

सरस कल्पना के भावुक कवि। स्वभाविक, चलती हुई व्यंजनापूर्ण भाषा के लिए स्मरणीय।

रीतिकालीन अलक्षित कवि।

संत यारी के शिष्य। आध्यात्मिक अनुभव को सरल भाषा में प्रस्तुत करने वाले अलक्षित संत-कवि।

प्राचीन काव्य के ख्यातिप्राप्त टीकाकार और अलक्षित कवि।

1815 -1881

रीतिकालीन अलक्षित कवि।