रीतिकाल

काव्यशास्त्र की विशेष परिपाटी का अनुसरण करने के कारण 1643 ई. से 1843 ई. के समय को साहित्य का रीतिकाल कहा गया है। घोर शृंगार काव्य के अतिरिक्त इस दौर में भावुक प्रेम, वीरता और नीतिपरक कविताएँ लिखी गईं।

सूफ़ी कवि

सूफ़ी संत और नीतिकार। ब्रजभाषा पर अधिकार। नीति वर्णन के लिए दोहा और सोरठा छंद का चुनाव।

संत और भक्तकवि। वेदांत और सूफ़ीवाद का एक साथ निर्वाह करने के लिए समादृत।

मध्व संप्रदाय के वैष्णव भक्त। पदों में सूफ़ीज़्म और सगुण भक्ति का सामजंस्य।