नवीन रांगियाल के बेला
80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक
यह बात मान लेनी चाहिए कि हम अपने अतीत से कितना स्नेह रखते हैं। हम वहाँ सुखद अनुभूति करते हैं, सुरक्षित महसूस करते हैं। अ
क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ : होमर के महाकाव्य की उदास सिनेमाई पुनर्रचना
एक राजा और महानायक होते हुए भी ओडिसस की ज़िंदगी कोई जश्न नहीं है, बल्कि एक लंबा इंतज़ार, एक बेबसी और ज़िंदगी के आख़िर मे
मुकुल शिवपुत्र : समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो
समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ठुमरी सुनी। ख़याल भी। इंदौर और देवास में स्टेज के सामने दरी पर बैठकर घंटों सुन
सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम
अँग्रेज़ी में एक कहन है : people who show you new music are important. मैं अक्सर अपने मित्रों और परिचितों को नए गीत भेजता
पंडित छन्नूलाल मिश्र : तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है
अगर हम गा पाते तो गाकर आपका बखान करते महाराज! लेकिन हमारी ज़िंदगी में लय नहीं है उतनी, इसमें खरज ज़्यादा है, ज़िंदगी का रिय
बीथोवन के संगीत के लिए
दुनिया को हिटलर के ‘होलोकास्ट’ के लिए नहीं, बीथोवन की ‘सिम्फ़नी’ के लिए याद रखा जाना चाहिए। हिटलर की नफ़रत से और उसके द