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भाई पर बेला

एक सामाजिक और पारिवारिक

प्राणी के रूप में कवि की अभिव्यक्ति में पारिवारिक संबंधों की धूप-छाँह, घर में गुज़रे पलों की स्मृतियाँ और दंश, नाते-रिश्तेदार आदि का उतरना भी बेहद स्वाभाविक है। इस चयन में प्रस्तुत भाई विषयक कविताओं में इस अनूठे संबंध की ऊष्मा और ऊर्जा को महसूस किया जा सकता है।

31 जनवरी 2026

चेख़व का पत्र निकोलाय के लिए : देखो, जीवन की अपनी शर्तें होती हैं...

चेख़व का पत्र निकोलाय के लिए : देखो, जीवन की अपनी शर्तें होती हैं...

मॉस्को, 1886 …तुम मुझसे अक्सर शिकायत करते रहे हो कि लोग तुम्हें “समझते” नहीं हैं! गेटे और न्यूटन ने कभी ऐसी शिकायत नह

19 अगस्त 2024

जो रेखाएँ न कह सकेंगी

जो रेखाएँ न कह सकेंगी

एक युग बीत जाने पर भी मेरी स्मृति से एक घटा भरी अश्रुमुखी सावनी पूर्णिमा की रेखाएँ नहीं मिट सकी हैं। उन रेखाओं के उजले र