रोहित अनिल त्रिपाठी के बेला
23 जून 2026
एक नीट अभ्यर्थी और उम्मीद का न्यूनतम बैलेंस
नीट की परीक्षा देने गए मेरे एक भाई के बाल बड़े थे। बाहर खड़े ज़िम्मेदारों ने उसके बालों में हाथ डालकर यह जाँच की कि कहीं उसमें कोई पुर्ज़ी तो नहीं है। मुझे इस सख़्ती पर ऐतबार भी आया और ग़ुस्सा भी। भरो
नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र
नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र सिर्फ़ दूरी का नहीं होता; यह एक ऐसे अँधेरे से गुज़रने जैसा होता है, जहाँ हर क़दम पर आदमी ख़ुद से थोड़ा-थोड़ा टूटता है... और मैं अब इस झूठ के साथ नहीं जीना चाहता कि
मैं वीगन क्यों नहीं हूँ!
सड़क पर भीख माँगते किसी व्यक्ति से कभी पूछियेगा कि गाली सुनने के बाद उसे कैसा लगता है? फिर यही ख़ुद से पूछियेगा। दोनों सवालों के जवाबों में जो अंतर आए, उससे इस समाज का अंतर आपको पता लग जाएगा। आप पेट भर
‘हिन्दवी’ उत्सव में न जा पाए एक हिंदीप्रेमी का बयान
‘हिन्दवी’ अब दूर है। उसके आयोजन भी। जब दिल्ली में था तो एक दफ़ा (लखनऊ में ‘हिन्दवी’ उत्सव के आयोजन पर) सोच रहा था कि लखनऊ में क्यों नहीं हूँ? अब लखनऊ में बैठा सोचता हूँ कि ‘हिन्दवी’ के इस आयोजन के समय