जगह-जगह 2.0 : मोबी-डिक : सनक, साहस और समुद्र की कथा
निशांत कौशिक
30 जनवरी 2026
पानी
ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है
इसे देखें कि इसमें डूब जाएँ
—अहमद मुश्ताक़
समुद्र-साहित्य केवल साहसिक कथाओं से नहीं बना है। उसमें एक आदिम पुकार है कि पानी अपनी ओर खींचता है। उसमें मृत्यु और उत्पत्ति की प्राचीनतम स्मृतियाँ हैं। सारे रास्ते ख़त्म होकर पानी में गिर जाते हैं। घाटों पर भीड़ जमा होती है। कितनी नदियाँ साझा मानव स्मृति में अब तक बह रही हैं। पानी से यह खिंचाव समुद्री साहित्य की आत्मा है।
रघुवीर सहाय के ‘मन में पानी के अनेक संस्मरण हैं’, आलोकधन्वा के ‘शहर और समुद्र एक-दूसरे की याद से भरे हुए हैं’, तथा उनका समुद्र ‘सूर्य और नमक’ का है और समुद्रों के भीतर ‘आसमान जैसी हवाएँ हैं’। लोर्का के समुद्र के ‘दाँत झाग के हैं’ और ‘होंठ आसमान के’। गुलज़ार के शहर ‘न पूरी तरह समुद्र में उतरते हैं न उसे छोड़ते हैं’।
मिथकीय कथाओं में समुद्र के दैत्य, हख़ामनी और रोमन साम्राज्यों के समुद्र पर लंबे-चौड़े अभियान, ओडिसी से एनीड तक, सिंदबाद की यात्राओं से कॉलरिज की द राइम ऑफ़ दी एंशियंट मरीनर तक समुद्री साहित्य अपनी परंपराएँ गढ़ चुका था—अब इसमें जहाज़ी-डायरी साहसिक कथाएँ, अभिलेख और समुद्री-युद्ध, तबाही और अभियानों में बचे रह जाने की कहानियाँ भी शामिल हो गई थीं।
हरमन मेलविल का समुद्र इन सबसे, यहाँ तक कि परवर्ती लेखक कोनराड और हेमिंग्वे के समुद्रों से भी अलग है। वे इसे एक दार्शनिक जामा देते हैं। साहित्य की प्राचीनतम कथानकों में से एक—पानी की ओर खिंचाव—को इस क़दर फैला देते हैं कि वह ब्रह्मांडीय हो जाता है। इस क्रम में वह नार्सिसस का हवाला देते हैं, जो जल में ख़ुद को खोजते हुए ख़ुद को खो देता है। बोर्हेस ने इसी संदर्भ में मेलविल के इस उपन्यास के बारे में कहा था कि “शब्दों और पन्नों से आगे बढ़ता हुआ यह विराट होता जाता है और ब्रह्मांडीय उपन्यास में बदल जाता है।” यह उपन्यास अपने लिखे और अपने ख़ुद के रचे यथार्थ को भी भंग कर देता है।
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इस्माइल
God sobs in my arms. Call me Ishmael tonight.
—Agha Shahid Ali, Tonight
आग़ा शाहिद अली की इस अँग्रेज़ी ग़ज़ल के मक़्ते में Call me Ishmael, मेलविल के उपन्यास Moby-Dick की पहली पंक्ति है।
Call me Ishmael, कथा इतिहास में सबसे सादा और भ्रामक पंक्ति समझी जाती है। इस्माइल, उपन्यास के शुरुआती पन्नों में समुद्र के प्रति अपने अदम्य आकर्षण के बारे में बताता है। उसे समुद्र से दूर रहने या ज़मीन पर रहने से एक ऊब है; वह समुद्र के प्रति ख़ुद के इस खिंचाव को मानव इतिहास के प्राचीनतम और गहनतम आकर्षण के तौर पर प्रस्तुत करता है। यह आकर्षण सामान्य नहीं है और वह समुद्र देखने और यात्रा करने वालों से भिन्नता रखता है। वह समुद्र को देखने के नज़रिए पर भी अपनी भिन्नता को अभिव्यक्त करता है।
“I never go (to sea) as a passenger... Though I am something of a salt”
[Loomings, Moby-Dick]
अक्सर समुद्री उपन्यासों से अलग, मोबी-डिक दार्शनिक, बाइबिलीय और प्रतीकात्मक फैलाव लेता है। इसमें इसकी विषय-वस्तु का नयापन नहीं, बल्कि महत्त्वाकांक्षा का विस्तार है। उपन्यास के “Extract” में 80 से ऊपर उद्धरण दिए गए हैं; ये उद्धरण बाइबिल से लेकर प्लूटार्क, शेक्सपियर, मिल्टन से लेकर मेलविल के समवर्ती लेखकों तक फैले हैं। स्वयं बाइबिल से पाँच उद्धरण हैं। ये सभी व्हेल और समुद्र के बारे में हैं—जो कभी उसे सी मॉन्स्टर कहते हैं, कभी व्हेल तो कभी लेवीयाथन।
इस शुरुआत में एक ख़ासियत यह है कि इस्माइल उपन्यास का केंद्रीय किरदार नहीं है। वह संभवतः ख़ुद लेखक मेलविल भी नहीं है, बल्कि उपन्यास जिस सनकी कप्तान अहाब के इर्द-गिर्द घूमता है, उससे भी अलग है। इस्माइल समुद्र को एक दार्शनिक या आध्यात्मिक समस्या के रूप में उपन्यास में स्थापित करता है। वह तबाह हो चुके जहाज़ से बच गया था, और उसी जहाज़ की कथा वह सुना रहा है।
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व्हेल
What the White Whale was to Ahab, has been hinted; what, at times, he was to me, as yet remains unsaid.
[The Whiteness of the Whale, Moby-Dick]
मोबी-डिक उपन्यास का पूरा शीर्षक है Moby-Dick or, The Whale. इसकी केंद्रीय कथा में यही विशाल स्पर्म व्हेल है।
कथा सुनाने वाला इस्माइल जिस तबाह हो चुके जहाज़ की कथा सुना रहा है, वह अहाब नाम के एक कप्तान का समुद्री अभियान होता है। अहाब उस विशाल सफ़ेद स्पर्म व्हेल को मारना चाहता है जिसने कभी एक मुठभेड़ में उसका पैर निगल लिया था। यही व्हेल मोबी-डिक है।
अहाब जिस तरह सफ़ेद व्हेल को देखता है, वह इस्माइल से अलग है। इस्माइल व्हेल की सफ़ेदी के अर्थ टटोलता है; वह इसे अधि-प्राकृतिक (सुपर-नेचरल) जीव की तरह देखता है, एक अज्ञात शक्ति की तरह भी और इससे डरता है, लेकिन इसमें वह सौंदर्य, पवित्रता और शक्ति भी देखता है।
लेकिन अहाब व्हेल को चुनौती की तरह देखता है, और उसका व्हेल के लिए प्रतिशोध, उन्माद और आत्म-विनाश ही उपन्यास की केंद्रीय कथा है। इस कथा को इस्माइल सुना रहा है, जो उस समय अहाब के पेक्वोड जहाज़ पर सवार था और इस विनाशकारी यात्रा का गवाह था। कैप्टन अहाब की व्हेल को मारने की सनक के सामने जहाज़, उसके साथी और चालक—सब कुछ उसके लिए गौण हो जाते हैं। उसका एकमात्र उद्देश्य मोबी-डिक को ढूँढ़ना और मारना है, चाहे इसकी क़ीमत कुछ भी हो। यह सनक ही है कि वह व्हेल को निजी दुश्मन समझता है, मानो उसने जानबूझकर उसका पैर निगला हो; और वह एक व्यक्ति के तौर पर व्हेल को सृष्टि और जीवन के निकृष्टतम दुश्मनों में गिनता है—उसे नष्ट करना यानी बुराई से मुक्ति पाना। अहाब का यह उन्माद असाधारण रूप से पैथोलॉजिकल होता है।
इस उपन्यास का सबसे चमकीला पक्ष भी यही है कि कई-कई पन्ने और अध्याय व्हेल पर ही ख़र्च होते हैं—उसकी बनावट, उसके भिन्न रूप, उसके हड्डी के ढाँचे, उसका तेल और उसकी मिथकीय छवियाँ। यह विवरण उबाऊ नहीं लगते, क्योंकि इसमें केवल जानकारियों का सादा-सा जमावड़ा नहीं है।
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कप्तान अहाब
...to chase that white whale on both sides of land, and over all sides of earth, till he spouts black blood and rolls fin out.
[The Quarter-Deck, Moby-Dick]
उपरोक्त उद्धरण में अहाब, व्हेल को मारने की योजनाएँ बना रहा है। अहाब पहले से व्हेल-शिकारी रहा है और एक व्हेल-मुठभेड़ में पैर निगले जाने के बाद मोबी-डिक यानी सफ़ेद स्पर्म व्हेल के प्रति उसके मन में बेहद घृणा है। उसके लिए मोबी-डिक का होना मानव जीवन के लिए एक अपमान है। इस्माइल जिस तरह समुद्र के बारे में प्रश्न करता है, उसमें एक संतुलित आकर्षण और जिज्ञासा है; लेकिन अहाब के भीतर व्हेल को मारने की इच्छा में अर्थ को नियंत्रित करने की आकांक्षा का तत्त्व है। वह संसार को अपना उद्देश्य स्वीकार करने के लिए मजबूर करता है और अपने लक्ष्य को एक आध्यात्मिक अभियान मानता है।
कप्तान अहाब अमेरिका के प्रतीक की तरह भी पढ़ा जा सकता है। उसका चरित्र 19वीं शताब्दी और, कई हद तक, आज के अमेरिका का भी रूप है, जिसमें अहाब अमेरिका के अभिमान, आत्मबोध का दंभ, महत्वाकांक्षा और अपने अंतर्निहित विरोधाभासों को सघन रूप में व्यक्त करता है। अहाब का मोबी-डिक के प्रति उन्मादी प्रतिशोध उस राष्ट्रीय मानसिकता से मेल खाता है, जिसमें यह विश्वास निहित था कि मनुष्य—विशेषतः अमेरिका—प्रकृति, इतिहास और नियति पर अधिकार कर सकता है, और इसके लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
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अबूझ का आकर्षण
“...But that same image, we ourselves see in all rivers and oceans. It is the image of the ungraspable phantom of life”
[Chapter 1, Moby-Dick]
अहाब अर्थहीनता को बर्दाश्त नहीं कर सकता। वह संयोग, दुर्घटना और रहस्य के सामने अस्थिरता और असुरक्षा का प्रतीक है। वह पीड़ा का अर्थ नहीं, इरादा ढूँढ़ता है; अहाब के ज़रिये मेलविल आधुनिक मानव के कई संकटों का ख़ाका बनाते हैं।
इसके उलट, इस्माइल समुद्र को जीतता नहीं है; वह उसे सुनता है। वह विरोधाभासों और अनिश्चितताओं के बीच बना रहता है। उसकी अस्मिता इतनी गौण है कि अपने नाम के लिए भी पाठक को ही आमंत्रित करता है, मानो उसका नाम इस्माइल नहीं है, लेकिन उसे इस कथा-प्रस्थान में यह पुकारा जाए।
मोबी-डिक उपन्यास के पाठ की दुश्वारी उसकी नीयत का हिस्सा है। इसकी कथा अनंत के साथ टकराव की धृष्टता है, और व्हेल पर इसी लिहाज़ से व्याख्यायित होने और समझे जाने का बोझ भी है कि क्या वह भाग्य है, वह चेतना है, क्या वह अहाब के प्रति उदासीन है, क्या वह उसकी दुश्मन है, या वह उतनी ही शक्तिशाली है जितना अहाब उसे बना देता है।
उपन्यास इन्हीं पहलुओं के बीच पसरता और सिमटता है, और इसीलिए इसको पढ़ा जाना बहुत सारे आदिम भयों, इच्छाओं और मूर्खताओं को उनके विस्तार में देखना है।
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