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कर्म पर ग़ज़लें

अवधारि बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

देह के जब नाव, मन के घाट पर बांधल रही

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

विश्राम टा चाही

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

नाँव लिख-लिख के मिटावत

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

मद-भरल रात अबहीं

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

उमिर के लास कान्ही

नागेन्द्र प्रसाद सिंह