घास पर कविताएँ

प्रकृति, उर्वरता-अनुर्वरता,

जिजीविषा आदि विभिन्न प्रतीकों के रूप में घास कविता में उगती रही है।

घास

श्रीकांत वर्मा

घास और ईजा

अनिल कार्की

हरी घास का बल्लम

केदारनाथ अग्रवाल

घास

सुधीर रंजन सिंह

घास पर नंगे पैर

उद्भ्रांत

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