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घास पर कविताएँ

प्रकृति, उर्वरता-अनुर्वरता,

जिजीविषा आदि विभिन्न प्रतीकों के रूप में घास कविता में उगती रही है।

घास

श्रीकांत वर्मा

घास

कार्ल सैंडबर्ग

घास

तादेऊष रूज़ेविच

मिट्टी और घास

कानेको मिसुजु

घास

कार्ल सैंडबर्ग

मक़बरे

रवि यादव

पीयर दूभि

गुफरान जीलानी

घास और ईजा

अनिल कार्की

हरी घास का बल्लम

केदारनाथ अग्रवाल

घास

नितेश व्यास

घास

राजवीर

दूब

दुव्वूरि रामिरेड्डी

घास पर नंगे पैर

उद्भ्रांत

घास

सुधीर रंजन सिंह

हिन्दवी उत्सव 2026

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