कहानियाँ

कहानी गद्य की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा है। यह मानव-सभ्यता के आरंभ से ही किसी न किसी रूप में विद्यमान रही है। भारतीय परंपरा में इसका मूल ‘कथा’ में है। आधुनिक संदर्भों में इसका अभिप्राय अँग्रेज़ी के ‘शॉर्ट स्टोरी मूवमेंट’ से प्रभावित कहानी-परंपरा से है। इसका मुख्य गुण यथार्थवादी दृष्टिकोण है। हिंदी में कहानी का आरंभ अनूदित कहानियों से हुआ, फिर ‘सरस्वती’ पत्रिका के प्रकाशन के साथ मौलिक कहानियों का प्रसार बढ़ा। हिंदी कहानी के विकास में प्रेमचंद का अप्रतिम योगदान माना जाता है। प्रेमचंदोत्तर युग में जैनेंद्र, यशपाल सरीखे कहानीकारों ने नई परंपराओं का विस्तार किया। स्वातंत्र्योत्तर युग में नए वादों, विमर्शों और आंदोलन के साथ हिंदी कहानी और समृद्ध हुई।

1911 -1987

समादृत कवि-कथाकार-अनुवादक और संपादक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

1949

समादृत कथाकार। समय-समय पर काव्य-लेखन भी।

1916 -1990

समादृत उपन्यासकार-कथाकार। पटकथा-लेखन में भी योगदान। साहित्य अकादेमी-पुरस्कार से सम्मानित।

1925 -2014

यथार्थवादी धारा के समादृत कथाकार। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

1946

साठोत्तरी पीढ़ी के बाद के सुप्रसिद्ध कथाकार-उपन्यासकार और नाटककार। समकालीन हिंदी साहित्य के मुस्लिम विमर्श में योगदान।

1884 -1941

समादृत आलोचक, निबंधकार, साहित्य-इतिहासकार, कोशकार और अनुवादक। हिंदी साहित्य के इतिहास और आलोचना को व्यवस्थित रूप प्रदान करने के लिए प्रतिष्ठित।

1903 -1982

सुपरिचित उपन्यासकार, कहानीकार और निबंधकार। उपन्यासों में मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद के प्रयोग लिए उल्लेखनीय।

1752 -1817

मीर तक़ी मीर के समकालीन शायर। गद्य में 'रानी केतकी की कहानी' के लिए उल्लेखित।

1952

समादृत कवि-कथाकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

1910 -1996

शुक्लोत्तर युग के प्रमुख कथाकार, एकांकीकार और उपन्यासकार। निम्न-मध्यमवर्गीय यथार्थ चित्रण के लिए उल्लेखनीय।

1950 -2013

नवें दशक में उभरे कवि-गद्यकार। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

1885 -1952

द्विवेदीयुगीन निबंधकार और अनुरचनाकर। विदेशी व्यक्तित्वों के जीवनी-लेखक के रूप में भी योगदान।

1865

द्विवेदी युग के प्रमुख गद्यकार। ऐतिहासिक उपन्यास लेखन के प्रवर्तक के रूप में उल्लेखनीय।

1917 -1964

आधुनिक हिंदी कविता के अग्रणी कवियों में से एक। अपनी कहानियों और डायरी के लिए भी प्रसिद्ध।

1937 -2020

समादृत उपन्यासकार, कथाकार और नाटककार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

1891 -1960

समादृत उपन्यासकार और कथाकार। ऐतिहासिक प्रसंगों के प्रयोग के लिए उल्लेखनीय।

1982

नई पीढ़ी के सुपरिचित कहानीकार-उपन्यासकार। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित।

1936

सातवें दशक की प्रगतिशील धारा के प्रमुख कथाकार। ‘पहल’ पत्रिका के संपादक के रूप में समादृत।

1905 -1988

प्रेमचंदोत्तर युग के समादृत कथाकार, उपन्यासकार और निबंधकार। गद्य में मनोविश्लेषणात्मक परंपरा के प्रवर्तक।

1889 -1937

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। समादृत कवि-कथाकार और नाटककार।

1936 -2018

समादृत कवि-कथाकार और संपादक। महादेवी वर्मा और निराला पर लिखीं अपनी किताबों के लिए भी चर्चित।

1926 -1997

समादृत कवि-कथाकार और अनुवादक। ‘धर्मयुग’ साप्ताहिक के संपादक के रूप में भी चर्चित।

1929 -2005

समादृत उपन्यासकार-कथाकार और निबंधकार। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

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