रचित के बेला
25 अक्तूबर 2026
रील रसाचार्य : मेट्रो में रील
“अगला स्टेशन न्यू अशोक नगर है। दरवाज़े...” “ये लड़की बहुत बोलती है, ज़रा चुप रहोगी?” पहली आवाज़ मेट्रो के अनाउसमें
18 अक्तूबर 2026
रील रसाचार्य : रील में भागते लोग
यह देश एक महामेला है। वैसे तो पूरी दुनिया ही मेलों से बनी-बढ़ी है। यह मेले और बाज़ार ही थे जिन्होंने इस उपमहाद्वीप को हम
11 अक्तूबर 2026
रील रसाचार्य : रील बीच नाना
मैं संभवत: तीसरी या चौथी कक्षा में था जब छोटे भाई ने कहा सिर के पीछे नहीं मारना चाहिए यहाँ पे छोटा दिमाग़ होता है। यह बा
04 अक्तूबर 2026
रील रसाचार्य : रील काटने और कटवाने वाले
जब कोई वक्ता किसी सार्वजनिक मंच पर बोलता है और जानता है कि कैमरे लगातार उसे रिकॉर्ड कर रहे हैं, तो वह कुछ अतिरिक्त सतर्क
27 सितम्बर 2026
रील रसाचार्य : फ़ाइव रील-एक्सपेरिमेंट
एक दोस्त के साथ फ़िल्म देख रहा था। हर महत्त्वपूर्ण दृश्य से पहले; आगे क्या होने वाला है, उसे पहले से पता था। जब ऐसा दो ब
20 सितम्बर 2026
रील रसाचार्य : माटी को पुतरा कैसे नचत है
रील का क्या है! ‘हिन्दवी’ ने एक कॉलम घोषित किया था : ‘रीलमरील’। इसे जिन्हें लिखना था, वह लिख नहीं पाए। इसके बावजूद समय-स
तिग्मांशु धूलिया : मोटिवेशन के दौर में
तिग्मांशु धूलिया बॉलीवुड में जब पहचाने गए, जब चमके, उससे बहुत पहले से वह बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में पर्दे के पीछे की बहुत
अलंकार मिश्रा का क्या है!?
एक दुबला-पतला आदमी अलंकार मिश्रा! बीड़ी (या...) पीते हुए रील्स में दिखता है। गाँव-क़स्बे जैसा बैकग्राउंड, बिना माइक की आ
सब एक-दूसरे को कॉकरोच समझ रहे थे!
इंट्री मुझे किसी ने कहा था कि शाम पाँच बजे के बाद पुलिस अंदर नहीं जाने देगी। मैं हड़बड़ाया हुआ जब जंतर-मंतर पहुँचा त
केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं
किसे चाहिए मन का सोना आँख का मोती किसे पड़ी है अंदर क्या है होती रेत है लगता पानी [वर्ष 2015 में आई इम
भाड़े के श्रोता और दाद का कारोबार
मैं उन दिनों बरेली में पढ़ रहा था। एक मुशायरा होने वाला था, जिसकी बड़ी धूम थी। हिंदी-उर्दू की मंचीय कविता के सारे बड़े न
ज़ेन ज़ी का पॉलिटिकल एडवेंचर : नागरिक होने का स्वाद
जय हो! जग में चले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को। जिस नर में भी बसे हमारा नाम, तेज को, बल को। —दिनकर, रश्मिरथी | प्रथम सर
'दुपहिया' की डायरेक्टर सोनम नायर से बातचीत
गए दिनों अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई एक वेब सीरीज़—‘दुपहिया’। सोशल मीडिया में इस सीरीज़ को लेकर ख़ासी चर्चा हो रही
दारा शुकोह, मैनेजर पांडेय और कुछ झूठ
विश्वविद्यालयों में एक जुमला ख़ूब चलता है—“और भाई एमे, एम्फ़िल, जॉरगंस से निकल गए या वहीं फँसे हो।’’ मतलब यह कि नया विद्य