देवसेना का गीत

dewasena ka geet

जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद

देवसेना का गीत

जयशंकर प्रसाद

और अधिकजयशंकर प्रसाद

    नोट

    प्रस्तुत पाठ एनसीईआरटी की कक्षा बारहवीं के पाठ्यक्रम में शामिल है। —'स्कंदगुप्त' नाटक से

    आह! वेदना मिली विदाई!

    मैंने भ्रम-वश जीवन संचित,

    मधुकरियों की भीख लुटाई।

    छलछल थे संध्या के श्रमकण,

    आँसू-से गिरते थे प्रतिक्षण।

    मेरी यात्रा पर लेती थी—

    नीरवता अनंत अँगड़ाई।

    श्रमित स्वप्न की मधुमाया में,

    गहन-विपिन की तरु-छाया में,

    पथिक उनींदी श्रुति में किसने—

    यह विहाग की तान उठाई।

    लगी सतृष्ण दीठ थी सबकी,

    रही बचाए फिरती कबकी।

    मेरी आशा आह! बावली,

    तूने खो दी सकल कमाई।

    चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर,

    प्रलय चल रहा अपने पथ पर।

    मैंने निज दुर्बल पद-बल पर,

    उससे हारी-होड़ लगाई।

    लौटा लो यह अपनी थाती

    मेरी करुणा हा-हा खाती

    विश्व! सँभलेगी यह मुझसे

    इससे मन की लाज गँवाई।

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    जयशंकर प्रसाद

    जयशंकर प्रसाद

    स्रोत :
    • पुस्तक : अंतरा (भाग-2) (पृष्ठ 4)
    • रचनाकार : जयशंकर प्रसाद
    • प्रकाशन : एन.सी. ई.आर.टी
    • संस्करण : 2022
    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों का व्यापक शब्दकोश : हिन्दवी डिक्शनरी

    ‘हिन्दवी डिक्शनरी’ हिंदी और हिंदी क्षेत्र की भाषाओं-बोलियों के शब्दों का व्यापक संग्रह है। इसमें अंगिका, अवधी, कन्नौजी, कुमाउँनी, गढ़वाली, बघेली, बज्जिका, बुंदेली, ब्रज, भोजपुरी, मगही, मैथिली और मालवी शामिल हैं। इस शब्दकोश में शब्दों के विस्तृत अर्थ, पर्यायवाची, विलोम, कहावतें और मुहावरे उपलब्ध हैं।

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