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समीक्षा पर उद्धरण

रघुवीर सहाय का एक रूप आधुनिक मिज़ाज के प्रतिनिधि का है, दूसरा आधुनिकता के समीक्षक का।

कृष्ण कुमार

जो रचना नहीं कर सकता, वह समीक्षा करता है।

रघुवीर चौधरी

जन्म के बाद से मनुष्य लगातार मृत्यु की तरफ बढ़ता रहता है। बीच के ये दो दिन ही उसके कर्म के होते हैं। यह कर्म वह किस तरह करता है, इसी पर उसका मूल्यांकन किया जाता है।

बिमल मित्र

समीक्षा या समीक्षात्मक कसौटियाँ, अपने आप में विचार का काम भी करती हैं।

प्रयाग शुक्ल

हम सभी कम या अधिक अभिमतों के दास हैं।

विलियम हेज़लिट