साधारण का सहज सौंदर्य
‘‘जिस शैलजा से तुम यहाँ पहली बार मिल रहे हो मैं उसी शैलजा को ढूँढ़ने आई हूँ, सामने होकर भी मिलती नहीं है, अगर तुम्हें मुझसे पहले मिल जाए न, तो सँभालकर रख लेना।’’ ‘थ्री ऑफ़ अस’ फ़िल्म के लगभग आधा बीत ज
सुदीप्ति
कविता की बुनियादी ताक़त का संग्रह
'नया रास्ता' (रश्मि प्रकाशन, लखनऊ) हरे प्रकाश उपाध्याय का ‘खिलाड़ी दोस्त तथा अन्य कविताएँ’ (2009) के बारह वर्ष बाद प्रकाशित दूसरा कविता-संग्रह है। यह आगमन एक ऐसे दौर में हुआ है, जब बहुत से पुराने रास्त
मोहन कुमार डहेरिया
संतृप्त मनोवेगों का संसार
‘आश्चर्यवत्’ सौ से भी कम पृष्ठों का निर्भार संग्रह है, लेकिन माथे पर थाप दी गई आचार्य वागीश शुक्ल की दस पृष्ठों की भूमिका से कुछ उलार-सा लगता है। इस तरह इसे आप ‘आचार्यवत्’ भी कह सकते हैं। आचार्य ने कल
आशीष मिश्र
दिल्ली एक हृदयविदारक नगर है
‘कविता का जीवन’ असद ज़ैदी का दूसरा कविता-संग्रह है। पहला सात वर्ष हुए ‘बहनें और अन्य कविताएँ’ के नाम से प्रकाशित हुआ था। इसमें 48 कविताएँ थीं। ‘कविता का जीवन’ किंचित छोटा, परंतु अधिक संगठित संग्रह है।
रघुवीर सहाय
पुरानी उदासियों का पुकारू नाम
एक साहित्यिक मित्र ने अनौपचारिक बातचीत में पूछा कि आप महेश वर्मा के बारे में क्या सोचते हैं? मेरे लिए महेश वर्मा के काव्य-प्रभाव को साफ़-साफ़ बता पाना कठिन था, लेकिन जो चुप लगा जाए वह समीक्षक क्या! मैंन
आशीष मिश्र
अ-भाव का भाव—‘अर्थात्’
मैंने अमिताभ चौधरी को नहीं देखा है। लेकिन उनकी कविताओं से ऐसा चित्र उभरता है कि कोई जनसंकुल बस्ती से दूर निर्जन अँधेरे बीहड़ में दिशाहीन चला जा रहा है। इस अछोर अँधेरे से आतीं बेचैन प्रतिध्वनियों का हॉर
आशीष मिश्र
आदिवासी अंचल की खोज
आज यह सोचकर विस्मय होता है कि कभी मार्क्सवादी आलोचना ने नई कविता पर यह आक्षेप किया था कि ये कविताएँ ऐंद्रिक अनुभवों के आवेग में सामाजिक अनुभवों की उपेक्षा करती हैं। आज आधी सदी बाद जब काव्यानुभव में इं
आशीष मिश्र
‘प्रेम में मरना सबसे अच्छी मृत्यु है’
इस सृष्टि में किसी के प्रेम में होना मनुष्य की सबसे बड़ी नेमत है। उसके सपनों के जीवित बचे रहने की एक उम्मीद भरी संभावना। मोमिन का एक मशहूर शे’र है : तुम मेरे पास होते हो गोया जब कोई दूसरा नहीं होत