बलात्कार पर कविताएँ

बलात्कार निकृष्टतम अपराधों

में से एक है जो अपनी समग्रता में पूरी मानवीयता को शर्मसार करता है। कविता ने इस विषय पर लगातार संवाद की कोशिश की है। प्रस्तुत चयन ऐसी ही कविताओं का है।

बचपन से लिंग अब तक

उस्मान ख़ान

सरिये

नवीन रांगियाल

चुप्पी का समाजशास्त्र

जितेंद्र श्रीवास्तव

मत्स्यगंधा

कुलदीप कुमार

ख़तरा

नवीन रांगियाल

ख़तरे से भरी रात

नीलेश रघुवंशी

हमारे पास जो है

संतोष अर्श

एक माँ का एकालाप

मोहन कुमार डहेरिया

बलात्कार के बाद

नेहा नरूका

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