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यौवन पर कवित्त

यौवन या जवानी बाल्यावस्था

के बाद की अवस्था है, जिसे जीवनकाल का आरंभिक उत्कर्ष माना जाता है। इसे बल, साहस, उमंग, निर्भीकता के प्रतीक रूप में देखा जाता है। प्रस्तुत चयन में यौवन पर बल रखती काव्य-अभिव्यक्तियों को शामिल किया गया है।

नारिन के कारज करि जानति न नीके तैं

पंडित युगलकिशोर मिश्र

हिन्दवी उत्सव 2026

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