नश्वर पर काव्य खंड

मानव शरीर की नश्वरता

धार्मिक-आध्यात्मिक चिंतन के मूल में रही है और काव्य ने भी इस चिंतन में हिस्सेदारी की है। भक्ति-काव्य में प्रमुखता से इसे टेक बना अराध्य के आश्रय का जतन किया गया है।

पाहुड़ दोहा-17

मुनि रामसिंह

पाहुड़ दोहा-13

मुनि रामसिंह

पाहुड़ दोहा- 2

मुनि रामसिंह