नश्वर पर चौकड़ियाँ

मानव शरीर की नश्वरता

धार्मिक-आध्यात्मिक चिंतन के मूल में रही है और काव्य ने भी इस चिंतन में हिस्सेदारी की है। भक्ति-काव्य में प्रमुखता से इसे टेक बना अराध्य के आश्रय का जतन किया गया है।

पापी पिंजरा परौ पुरानो

परमलाल कुशवाहा ‘परम’

जो सब घरवारे को घर है

परमलाल कुशवाहा ‘परम’

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