साधारण सही दिमाग़ वाले व्यक्तियों में भी वैयक्तिक महक; यौन-आकर्षण तथा विकर्षण का बहुत बड़ा भाग अदा करती है, इसी को कभी-कभी गंध-प्रधानतावाद कहा जाता है।
रसिक व्यक्ति को आकस्मिक रूप से, या अन्यथा देर-सवेर में यह मालूम हो ही जाता है कि सबसे अतरंग संबंध में अधिकांश लोगों के लिए महक या गंध, बहुत भारी महत्व रखती है।
यौन-मिलन स्वयं एक बड़ी हद तक विशेष ढंग की चार्मिक प्रतिक्रिया है।