शृंगार पर कवित्त

सामान्यतः वस्त्राभूषण

आदि से रूप को सुशोभित करने की क्रिया या भाव को शृंगार कहा जाता है। शृंगार एक प्रधान रस भी है जिसकी गणना साहित्य के नौ रसों में से एक के रूप में की जाती है। शृंगार भक्ति का एक भाव भी है, जहाँ भक्त स्वयं को पत्नी और इष्टदेव को पति के रूप में देखता है। इस चयन में शृंगार विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

संपूर्ण मूर्त वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

पग नख वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

घुँघरू वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

पलक वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

श्याम वर्ण वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

शीशफूल वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

पग अँगुलि वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

पग वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

जावक वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

जूड़ा वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

बरौनी वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

छवि वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

बिंदी वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

घूँघट-युक्त नैन वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

एड़ी वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

कटि वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'

नैन वर्णन (नखशिख)

अब्दुर्रहमान 'प्रेमी'