नृत्य पर कविताएँ

नृत्य को मानवीय अभिव्यक्तियों

का रसमय प्रदर्शन कहा गया है। भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा में तो सृष्टि की रचना और संहार तक से नृत्य का योग किया गया है। प्रस्तुत चयन में नृत्य से अभिभूत कविताओं का संकलन किया गया है।

नाचती हुई स्त्री

पायल भारद्वाज

नृत्य

शुभा

नाच

अज्ञेय

हेलेन

दिनेश कुशवाह

रोष नृत्य

चंदन यादव

पंडवानी की लय पर

विपिन चौधरी

नया नाच

सविता सिंह

रेत और नृत्य

अनिल मिश्र

नृत्य

अंकुर मिश्र

नर्तकी

महेश आलोक

नाच

कमल जीत चौधरी

नृत्यांगना

हरीशचंद्र पांडे

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