गाली पर कविताएँ

गालियों को लोक-व्यवहार

का अंग कहा गया है। कहा तो यह भी जाता है कि जब भाषा लाचार होकर चुक जाती है, तब गाली ही अभिव्यक्ति का माध्यम बनती है। यहाँ इस चयन में अभिव्यक्ति के लिए गाली को केंद्र बनाने वाली रचनाएँ संकलित हैं।

नंगी गालियाँ

नाज़िश अंसारी

गालियाँ

सविता भार्गव

प्रेम की गालियाँ

बाबुषा कोहली

गणमान्य तुम्हारी...

अविनाश मिश्र

मध्यवर्ग

अमन त्रिपाठी

वो स्साला बिहारी

अरुणाभ सौरभ

गाली

प्रमोद कुमार तिवारी

गालियाँ

प्रेम रंजन अनिमेष