जामिया में हुआ दिल्ली का पहला ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन
हिन्दवी डेस्क
17 अक्तूबर 2024
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के FTK-CIT सभागार में, 16 अक्टूबर को ‘कैंपस कविता’ का आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन रेख़्ता समूह के उपक्रम ‘हिन्दवी’ ने लिटरेरी क्लब, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सहयोग से किया। दिल्ली में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ का यह पहला आयोजन था। इसमें साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित कवि अनामिका, सुप्रसिद्ध कवि लीलाधर मंडलोई और सुपरिचित कवि लीना मल्होत्रा राव कविता-पाठ के लिए आमंत्रित थे।
प्रतियोगिता में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों द्वारा अपनी-अपनी स्वरचित कविताओं की प्रविष्टि जमा की गई। जिसमें से काव्य-प्रतियोगिता के लिए चयनित प्रतिभागियों थे : मयंक यादव, अंबर सोमवंशी, मोहम्मद तनवीर हसन, सचिन आनंद, हनीफ़ ख़ान, राहुल खंडेलवाल, फ़िरदौस आलम, मृगांक शेखर मिश्रा, मोहम्मद मुअस्सर और तऊज़ तनवीर।
दो सत्रों के इस कार्यक्रम में कैंपस के विद्यार्थियों को आमंत्रित कवियों से जुड़ने और उनके सम्मुख अपनी कविताएँ सुनाने का अवसर प्राप्त हुआ। साथ ही प्रतिभागियों और श्रोताओं को आमंत्रित कवियों का कविता-पाठ सुनने का अवसर भी मिला।
बतौर निर्णायक आमंत्रित कवियों ने विद्यार्थी-कवियों की कविताओं पर बात की, और 10 प्रतिभागी कवियों में से मोहम्मद मुअस्सर (प्रथम पुरस्कार), सचिन आनंद (द्वितीय पुरस्कार), फ़िरदौस आलम (तृतीय पुरस्कार) और राहुल खंडेलवाल (सांत्वना पुरस्कार) को पुरस्कृत किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जामिया मिल्लिया इस्लामिया हिंदी भाषा विभाग से संबद्ध प्रोफ़ेसर और सुपरिचित कवि-गद्यकार दिलीप शाक्य और विश्वविद्यालय के ही अँग्रेज़ी भाषा विभाग से संबद्ध असिस्टेंट प्रोफ़ेसर रूमी नक़वी और अन्य विभागों से संबद्ध शिक्षकों का सहयोग रहा। 'हिन्दवी' की ओर से अनुराधा शर्मा, अविनाश मिश्र, और मनोज सिंह ने ‘कैंपस कविता’ के सारे क्रियाकलापों में सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन के दोनों सत्रों का संचालन ‘हिन्दवी’ से संबद्ध हरि कार्की ने किया।
हिन्दवी का प्रयोग—‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन विश्वविद्यालयों और हिंदी-साहित्य-संसार में एक रचनात्मक और सफल पहल की भाँति आगे बढ़ रहा है। यह आयोजन हिंदी-संसार की अभी-अभी की नई पीढ़ी को—हिंदी के श्रेष्ठ कवियों के मार्गदर्शन में रचनात्मकता से अवगत कराने में भी अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है। इस आयोजन की शुरुआत ‘हिन्दवी’ ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग) के साथ वर्ष 2022 में सितंबर महीने में की थी। इस सिलसिले में आगे—
• शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, देहरादून
• केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, बठिंडा
• हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद
• केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, महेंद्रगढ़
• बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ
• अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
• एनसीईआरटी, भोपाल
• राम लखन सिंह यादव कॉलेज, राँची
• वी.एस.एस.डी. कॉलेज, कानपुर
• देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
• विश्व-भारती, शांतिनिकेतन, बोलपुर
• महादेवी वर्मा सृजन पीठ, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल
• लिटरेरी क्लब, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली
के साथ मिलकर अब तक हिन्दवी कैंपस कविता के 14 सफल आयोजन हो चुके हैं।
'बेला' की नई पोस्ट्स पाने के लिए हमें सब्सक्राइब कीजिए
कृपया अधिसूचना से संबंधित जानकारी की जाँच करें
आपके सब्सक्राइब के लिए धन्यवाद
हम आपसे शीघ्र ही जुड़ेंगे
बेला पॉपुलर
सबसे ज़्यादा पढ़े और पसंद किए गए पोस्ट
25 अक्तूबर 2025
लोलिता के लेखक नाबोकोव साहित्य-शिक्षक के रूप में
हमारे यहाँ अनेक लेखक हैं, जो अध्यापन करते हैं। अनेक ऐसे छात्र होंगे, जिन्होंने क्लास में बैठकर उनके लेक्चरों के नोट्स लिए होंगे। परीक्षोपयोगी महत्त्व तो उनका अवश्य होगा—किंतु वह तो उन शिक्षकों का भी
06 अक्तूबर 2025
अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव
एक पहलवान कुछ न समझते हुए भी पाँड़े बाबा का मुँह ताकने लगे तो उन्होंने समझाया : अपने धर्म की व्यवस्था के अनुसार मरने के तेरह दिन बाद तक, जब तक तेरही नहीं हो जाती, जीव मुक्त रहता है। फिर कहीं न
27 अक्तूबर 2025
विनोद कुमार शुक्ल से दूसरी बार मिलना
दादा (विनोद कुमार शुक्ल) से दुबारा मिलना ऐसा है, जैसे किसी राह भूले पंछी का उस विशाल बरगद के पेड़ पर वापस लौट आना—जिसकी डालियों पर फुदक-फुदक कर उसने उड़ना सीखा था। विकुशु को अपने सामने देखना जादू है।
31 अक्तूबर 2025
सिट्रीज़ीन : ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना
सिट्रीज़ीन—वह ज्ञान के युग में विचारों की तरह अराजक नहीं है, बल्कि वह विचारों को क्षीण करती है। वह उदास और अनमना कर राह भुला देती है। उसकी अंतर्वस्तु में आदमी को सुस्त और खिन्न करने तत्त्व हैं। उसके स
18 अक्तूबर 2025
झाँसी-प्रशस्ति : जब थक जाओ तो आ जाना
मेरा जन्म झाँसी में हुआ। लोग जन्मभूमि को बहुत मानते हैं। संस्कृति हमें यही सिखाती है। जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से बढ़कर है, इस बात को बचपन से ही रटाया जाता है। पर क्या जन्म होने मात्र से कोई शहर अपना ह