हिन्दवी ब्लॉग

साहित्य और कला की विभिन्न विधाओं का संसार

‘पुनः सवेरा एक और फेरा है जी का’

उस्ताद राशिद ख़ान को एक संगीत-प्रेमी कैसे याद कर सकता है? इस पर ठहरता हूँ तो कुछ तस्वीरें ज़ेहन में आती हैं। ‘राग यमन’, ‘मारवा’, ‘सोहनी’, ‘मेघ’ और ‘ललित’ जैसे गंभीर ख़याल गाने वाले सिद्ध गायक—राशिद ख़ा ...और पढ़िए

कुमार मंगलम | 11 जनवरी 2024

साधारण का सहज सौंदर्य

‘‘जिस शैलजा से तुम यहाँ पहली बार मिल रहे हो मैं उसी शैलजा को ढूँढ़ने आई हूँ, सामने होकर भी मिलती नहीं है, अगर तुम्हें मुझसे पहले मिल जाए न, तो सँभालकर रख लेना।’’ ‘थ्री ऑफ़ अस’ फ़िल्म के लगभग आधा बीत ...और पढ़िए

सुदीप्ति | 09 जनवरी 2024

रात का कौन-सा पहर है

‘‘रात का कौन-सा पहर है? कौन-सा तारा डूबा है? क्या चंद्रमा त्रिकोण हो चुका है?’’ शायद रात हो गई है और तुम वृद्ध। न तुम्हारे सिरहाने कोई प्रकाश करने वाला है, न ही कोई तुमसे बात करना चाहता है। बरसात ...और पढ़िए

सौरभ पांडेय | 20 दिसम्बर 2023

मन एक डिस्ग्राफ़िया ग्रस्त बच्चे की हैंडराइटिंग है

चीज़ों को बुरी तरह टालने की बीमारी पनप गई है। एक पल को कुछ सोचती हूँ, अगले ही पल एक अदृश्य रबर से उसे जल्दबाज़ी से मिटाते हुए बीच में ही छोड़कर दूसरी कोई बात सोचने लगती हूँ। इन दिनों काम है कि लकड़ियों क ...और पढ़िए

अंकिता शाम्भवी | 19 दिसम्बर 2023

यह भूमि माता है, मैं पृथिवी का पुत्र हूँ

हिंदी के साहित्य-सेवियों को पृथिवी-पुत्र बनना चाहिए। वे सच्चे हृदय से यह कह और अनुभव कर सकें— माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः (अथर्ववेद) यह भूमि माता है, मैं पृथिवी का पुत्र हूँ। लेखकों में यह ...और पढ़िए

वासुदेवशरण अग्रवाल | 18 दिसम्बर 2023

कविता की बुनियादी ताक़त का संग्रह

'नया रास्ता' (रश्मि प्रकाशन, लखनऊ) हरे प्रकाश उपाध्याय का ‘खिलाड़ी दोस्त तथा अन्य कविताएँ’ (2009) के बारह वर्ष बाद प्रकाशित दूसरा कविता-संग्रह है। यह आगमन एक ऐसे दौर में हुआ है, जब बहुत से पुराने रास् ...और पढ़िए

मोहन कुमार डहेरिया | 17 दिसम्बर 2023

सत्य की व्याख्या साहित्य की निष्ठा है

‘वयं रक्षामः’ के पूर्व निवेदन मेरे हृदय और मस्तिष्क में भावों और विचारों की जो आधी शताब्दी की अर्जित प्रज्ञा-पूँजी थी, उस सबको मैंने ‘वयं रक्षामः’ में झोंक दिया है। अब मेरे पास कुछ नहीं है। लुटा-प ...और पढ़िए

चतुरसेन शास्त्री | 16 दिसम्बर 2023

बनारस : आत्मा में कील की तरह धँसा है

एक बनारस के छायाकार-पत्रकार जावेद अली की तस्वीरें देख रहा हूँ। गंगा जी बढ़ियाई हुई हैं और मन बनारस में बाढ़ से जूझ रहे लोगों की ओर है, एक बेचैनी है। मन अजीब शै है। दिल्ली में हूँ और मन बनारस में है। ...और पढ़िए

कुमार मंगलम | 15 दिसम्बर 2023

प्रति-रचनात्मकता : रचनात्मकता का भ्रम और नया समाजशास्त्र

वाल्टर बेंजामिन का एक प्रसिद्ध और महत्त्वपूर्ण निबंध है—‘द वर्क ऑफ़ आर्ट इन द एज ऑफ़ मेकेनिकल रिप्रोडक्शन'। बीसवीं सदी में लिखा हुआ यह निबंध आज पहले से भी कहीं अधिक प्रासंगिक और ज्वलंत दिखाई देता है। ब ...और पढ़िए

आदित्य शुक्ल | 13 दिसम्बर 2023

हिंदी का पहला मुसलमान कवि

हिंदी साहित्य को 11वीं-12वीं सदी का एक मुसलमान कवि मिला, जिसे नाम दिया गया—महाकवि अब्दुल रहमान। अब्दुल रहमान को 'हिंदी का पहला मुसलमान कवि' मानते हैं। हिंदीवालों के हिसाब से अब्दुल रहमान के बाद हिंदी ...और पढ़िए

दयाशंकर शुक्ल सागर | 13 दिसम्बर 2023

जश्न-ए-रेख़्ता (2023) उर्दू भाषा का सबसे बड़ा उत्सव।

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