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Kumar Manglam's Photo'

कुमार मंगलम

1992 | कैमूर, बिहार

नई पीढ़ी के कवि-आलोचक।

नई पीढ़ी के कवि-आलोचक।

कुमार मंगलम के बेला

25 सितम्बर 2025

बीमार मन स्मृतियों से भरा होता है

बीमार मन स्मृतियों से भरा होता है

गए दिन जैसे गुज़रे हैं उन्हें भयानक कहूँ या उस भयावहता का साक्षात्कार, जिसका एक अंश मुझ-से मुझ-तक होकर गुज़रा है। चोर घा

09 मई 2025

मोना गुलाटी की [अ]कविता

मोना गुलाटी की [अ]कविता

मोना गुलाटी अकविता की प्रतिनिधि कवि हैं। अकविता का मूल तत्त्व असहमति और विरोध से निर्मित हुआ है। असहमति और विरोध अक्सर स

05 अप्रैल 2025

शोक स्थायी है

शोक स्थायी है

मैं कितना अपढ़ और अहंकारी हुआ जाता हूँ, इसका भान भी पढ़ने और जीने से ही आता है। आजकल ऐसा लगता है कि मैं अपने आप को ही

18 जनवरी 2025

आज़ादी मिथ है... हम किसके ग़ुलाम हैं !

आज़ादी मिथ है... हम किसके ग़ुलाम हैं !

तुम्हारी अधेड़ नादानियों को कैसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है? इस नुक़्ते पर सोचते हुए घृणा या नफ़रत नहीं होती। अगर मैं कह

10 जुलाई 2024

आजकल लोग पैदा नहीं होते अवतरित होते हैं

आजकल लोग पैदा नहीं होते अवतरित होते हैं

सोचता हूँ कुछ लिखूँ पर लिखने के उत्साह पर अवसाद भारी है। ~ भाषा का बुनियादी ताना-बाना शब्दों से कहीं अधिक प्रयोगों

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