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धर्मनिरपेक्षता पर कविताएँ

भारतीय संविधान में विशेष

संशोधन के साथ धर्मनिपेक्षता शब्द को शामिल किए जाने और हाल में सेकुलर होने जैसे प्रगतिशील मूल्य को ‘सिकुलर’ कह प्रताड़ित किए जाने के संदर्भ में कविता में इस शब्द की उपयोगिता सुदृढ़ होती जा रही है। यहाँ इस शब्द के आशय और आवश्यकता पर संवाद जगाती कविताओं का संकलन किया गया है।

मुसलमान

देवी प्रसाद मिश्र

अस्मिता

ज़ुबैर सैफ़ी

हलफ़नामा

असद ज़ैदी

फ़हमीदा आपा के नाम

सत्येंद्र कुमार

गले मिलते रंग

विनोद दास

डॉल्टनगंज के मुसलमान

विशाल श्रीवास्तव

गंगा मस्जिद

फ़रीद ख़ाँ

नूर मियाँ

रमाशंकर यादव विद्रोही

कर्बला

राजेश जोशी

तक़दीर का बँटवारा

रामधारी सिंह दिनकर

निज़ामुद्दीन

देवी प्रसाद मिश्र

मेरे अपराध

नवनीत पांडे

शब्द मुसलमान

उमा शंकर चौधरी

अहमदाबाद

शिव कुमार गांधी

विलय

राजेश शर्मा

ख़ुदा, रामचंदर में यारी है ऐसी

रमाशंकर यादव विद्रोही

लव जेहाद

फ़िरोज़ ख़ान

अयोध्या

कुबेर दत्त