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अहिंसा पर कविताएँ

अहिंसा का सामान्य अर्थ

है 'हिंसा न करना'। इसका व्यापक अर्थ है - किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुँचाना। मन में किसी का अहित न सोचना, किसी को कटुवाणी आदि के द्वार भी नुकसान न देना तथा कर्म से भी किसी भी अवस्था में, किसी भी प्राणी कि हिंसा न करना, यह अहिंसा है। जैन धर्म में अहिंसा का बहुत महत्त्व है। जैन धर्म के मूलमंत्र में ही अहिंसा परमो धर्म: (अहिंसा परम (सबसे बड़ा) धर्म कहा गया है। आधुनिक काल में महात्मा गांधी ने भारत की आजादी के लिये जो आन्दोलन चलाया वह काफी सीमा तक अहिंसात्मक था।

कवि जानता है

राजेश सकलानी

न्याय का नवजात

लवली गोस्वामी

रचना

रचित

मुलु न बाज आवा

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

पसु नीक कि मानुख

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

विघटन का अध्याय

विजयपाल सिंह बीदावत