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मज़दूर पर गीत

देश-दुनिया में पूँजीवाद

के प्रसार के साथ वंचित-शोषित तबकों के सरोकार को आवाज़ देना कविता ने अपना प्रमुख कर्तव्य स्वीकार किया है। इस क्रम में अर्थव्यवस्था को अपने कंधे पर ढोते मज़दूर पर्याप्त सहानुभूति और प्रतिरोध कोण से देखे गए हैं। इस चयन में मज़दूरों के संवादों-सरोकारों को विषय बनाती कविताओं का संकलन किया गया है।

ये मज़दूर है

अन्नू रिज़वी

गिरवी खेत

विनम्र सेन सिंह

ऊ आ हम

तैयब हुसैन पीड़ित

बैरिन बेयार

मूंगालाल शास्त्री

गिट्टी ऊ तूड़े

मूंगालाल शास्त्री

बनजारा दिन

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

नेह के पांती

गोरख पांडेय

बंदना

मूंगालाल शास्त्री

प्रेमलक्ष्य

धीरेन्द्र प्रेमर्षि

जागल आगि

शान्ति सुमन

मज़दूर, एक रूप

भोलानाथ गहमरी

मज़दूर

अन्नू रिज़वी