हास्य पर बेला
हास्य नौ रसों में से
एक रस है। व्यंग्य, प्रहसन, चुटकुले आदि इसके अंतर्गत आते हैं। इस चयन में हास्य-रस को केंद्र में रखकर संभव हुई कविताओं का संकलन किया गया है।
शंखनाद : सोच-समझवाले को थोड़ी नादानी दे मौला...
मेरे पास एक ही धन है—निकम्मापन। मैं बाय चॉइस निकम्मा नहीं हूँ। यह आलस्य और काहिली के संयुक्त उद्यम से उपजा है। ऐसा नहीं है कि मैं डेड वुड हूँ जो किसी काम के लिए प्रेरित नहीं होता; प्रेरित होता हूँ—जब
झाड़ियों का शाप
यह घटना नवंबर के आस-पास की है, जब सेमेस्टर का ख़ौफ़ हर विद्यार्थी पर तारी होता है। इन दिनों में हर अच्छा और गदहा विद्यार्थी आपको रट्टा मारते मिलेगा और बात अगर हॉस्टल में रहने वाले लड़कों की हो तो कहन
01 अप्रैल 2025
विश्वनाथ शर्मा ‘विमलेश’ से सुरेंद्र शर्मा तक
उनका पूरा नाम विश्वनाथ शर्मा ‘विमलेश’ था। ‘विमलेश राजस्थानी’ भी उन्हें कहा जाता था और कवियों के बीच वह विमलेशजी के नाम से मशहूर थे। विमलेशजी की चार लाइनों और उनके पढ़ने की नक़ल करने वाले सुरेंद्र शर